Thoughts of All The Times
Monday, 9 November 2015
मुखीं असावें एक नाम । याहून दुजें पुण्य नसे जाण ॥
मुखीं असावें एक नाम । याहून दुजें पुण्य नसे जाण ॥
नामीं ठेवावें चित्त । तेंच मानावे सत्य ।
--------------------------श्री सदगुरू ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज
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